नोएडा ,गुड़गांव,मानेसर के मजदूर आंदोलन पर रासुका सहित निर्मम दमन की जन संगठनों ने की तीखी निंदा*
मजदूरों के गुस्से का पाकिस्तान और नक्सली लिंक ढूंढने के बजाए कॉरपोरेट घरानों की गुलामी करना खत्म करे और मजदूरों को तुरंत मासिक 30000 रुपए न्यूनतम वेतन दे फासिस्ट भाजपा सरकार
नई दिल्ली 16 अप्रैल 2026.
नोएडा ,गुड़गांव, मानेसर ,फरीदाबाद,भिवाड़ी और पानीपत में लाखों मजदूर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।श्रमिक आंदोलन में 400 से अधिक मजदूरों और मजदूर आंदोलन के समर्थक बुद्धिजीवियों ,विद्यार्थियों की गिरफ्तारी, उन्हें जेल भेजने, बर्बर दमन करने और अब उन पर रासुका लगाने की पुलिस प्रशासन द्वारा की गई घोषणा की क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच RCF,जाति उन्मूलन आंदोलन CAM,अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन AIRSO और अखिल भारतीय क्रांतिकारी महिला संगठन AIRWO ने कड़ी निंदा की है। इन जन संगठनों के संयुक्त मंच ने फासिस्ट संघ परिवार के मार्गदर्शन में संचालित भाजपा सरकार से क्रूर दमनकारी नीतियों पर रोक लगाने,मोदी सरकार द्वारा अडानी अंबानी सरीखे महाभ्रष्ट कॉरपोरेट घरानों की जा रही गुलामी को खत्म करने ,कॉरपोरेट परस्त चार लेबर कोड को निरस्त करने,मजदूरों पर हो रहे क्रूर दमन नीति पर रोक, 9 और 1314 अप्रैल की हिंसा की न्यायिक जांच,दोषी प्रबंधकों और अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज हो,मजदूरों,बुद्धिजीवियों,विद्यार्थियों पर लगाए तमाम फर्जी आपराधिक मुकदमों की वापसी,तमाम मजदूर नेताओं,बुद्धिजीवियों,कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों की शीघ्र रिहाई ,स्थाई काम पर स्थाई नियुक्ति हो,ठेका प्रथा समाप्त हो और मासिक न्यूनतम वेतन 30000 रूपये सहित तमाम श्रम अधिकारों को बहाल करने की मांग की है।
इन चार संगठनों ने कहा है कि दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी संगठन RSS के मार्गदर्शन में मोदी सरकार और उनकी पिछलग्गू डबल इंजन भाजपा की राज्य सरकारों ने देशी-विदेशी कॉर्पोरेट घरानों के मुनाफे के लिए मेहनतकश वर्ग को तबाह कर दिया है। फासिस्ट मोदी सरकार ने सैकड़ों वर्षों के संघर्षों से हासिल अधिकारों को एक झटके में 4 लेबर कोड लाकर खत्म कर दिया है। काम के घंटे बढ़ा दिए गए, फ्लोर लेवल वेज लाकर न्यूनतम मजदूरी के अधिकार को छीन लिया गया और फिक्सड टर्म इम्पलाइमेंट के द्वारा मजदूरों की हासिल न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा भी समाप्त कर दी गई। स्थाई कामों में बेहद कम मजदूरी पर पूरी जिंदगी काम कराया जा रहा है। हायर और फायर की नीति के तहत मनमानी छंटनी कर दी जाती है। हालत इतनी बुरी है कि मजदूरों को साप्ताहिक अवकाश तक नहीं दिया जा रहा है। बढ़ती भीषण महंगाई और वैश्विक संकट के कारण रोजगार के खत्म होने से मजदूरों में गहरी निराश एवं बेचैनी पैदा हुई है। असमानता लगातार बढ़ रही है और ज्यादतर मजदूर 10000 रूपए मासिक वेतन से कम पर अपने परिवार की जीविका चलाने के लिए मजबूर हुए हैं। इन परिस्थितियों में पूरे देश में मजदूर अपना प्रतिवाद दर्ज कर रहे हैं और नोएडा ,मानेसर सहित देश के कई जगहों में हो रहे श्रमिक आंदोलन भी इसी की एक कड़ी है।
चार जन संगठनों ने कहा है कि मजदूरों से संवाद करने और उनके संवैधानिक सवालों का लोकतांत्रिक शांतिपूर्ण समाधान करने की जगह भाजपा सरकार दमन का रास्ता अपना रही है। मजदूरों के अधिकारों के संरक्षण के लिए ट्रेड यूनियन बनाने के संवैधानिक अधिकार और लेबर विभाग की भूमिका को बेहद कमजोर कर दिया गया है। यह लोकतांत्रिक प्रणाली और संवैधानिक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विरुद्ध है। इस पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए।
नोएडा में मजदूरों का आंदोलन होने के बाद से गोदी मीडिया चैनल योगी आदित्यनाथ का गुणगान गाने में लगे हुए हैं कि उन्होंने एक झटके में 21% वेतन वृद्धि कर दी।
सुनने में ये वृद्धि ठीक ही लगेगी लेकिन असलियत बहुत क्रूर है। इसे वास्तविक सैलरी के आंकड़ों से समझते हैं। नोएडा-गाजियाबाद में अकुशल मजदूरी 11,313 ₹ से बढ़ाकर 13,690 ₹, अर्धकुशल 12,745 ₹ से 15,059 ₹ और कुशल 13,940 ₹ से 16,868 ₹ रुपए कर दी गई। इसी वेतन वृद्धि का ढिंढोरा पीटकर योगी जी का गुणगान किया जा रहा है।
इन सब में सोचने वाली बात ये है कि वृद्धि से पहले अकुशल मजदूरों को सिर्फ 11,313 रूपये का वेतन दिया जा रहा था जो आज के समाज में जीने लायक भी नहीं और ये बात योगी जी को भी पता ही होगी। यानी उनकी मजदूरों के इस अथाह शोषण में सहमति थी।
दूसरी बात ये कि अगर मजदूरों का ये आंदोलन नहीं हुआ होता तो क्या वेतन वृद्धि होती? नहीं, बिल्कुल नहीं। यानी योगी जी की दयालुता नहीं बल्कि ये वृद्धि मजदूरों के आंदोलनों के दबाव में ही कि गयी है। यह मज़दूरों कि एक छोटी सी जीत है।
तीसरी बात ये कि जिस वृद्धि की वाहवाही की जा रही है उसका हाल भी देखिए। वृद्धि के बाद भी कुशल मजदूर को सिर्फ 16,868 रुपए मिलेंगे। आज की मंहगाई के हालात में ये रुपए कितने कम हैं, इसे हर मेहनतकश जानता है। और इस पर भी वो सरकारें जो अपनी अय्याशियों और विधायकों की खरीद-फरोख्त में अरबों रुपए खर्च कर देती हैं, अपनी छाती पीट रही हैं।
जिस वृद्धि पर शर्म आनी चाहिए उसका ढोल पीटा जा रहा है। सच तो ये है कि ये ढोल फटा हुआ है।
और तो और कॉरपोरेट घरानों की गोदी मीडिया भाजपा की हां में हां मिलाकर बदतर हाल में जी रहे मजदूरों के आक्रोश का लिंक पाकिस्तान और नक्सली आंदोलन से ढूंढ रहे हैं।ठीक वैसे ही जैसे संघ भाजपा दिल्ली के ऐतिहासिक किसान आंदोलन का लिंक खालिस्तानी आतंकवाद से जोड़ती आई है।CAA NRC के खिलाफ देश भर में हुए शाहीन बाग आंदोलन को भी फासिस्ट संघ परिवार अंतरराष्ट्रीय षडयंत्र बताती आई है।
इन चारों जन संगठनों ने संघ -भाजपा को कॉरपोरेट घरानों का लठैत बताते हुए कहा कि दिल्ली ,हरियाणा और उत्तरप्रदेश में जो लाखों मेहनतकश इस आदमखोर कॉरपोरेट पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश में एकजुट आवाज बुलंद कर रहे हैं,ये फासिस्ट संघ परिवार कॉरपोरेट राज की कब्र खोदेंगे।इस ताकतवर मजदूर आंदोलन ने भागवत मोदी शाह के अमृतकाल और हिंदुराष्ट्र परियोजना को बेनकाब कर दिया है।RCF,CAM, AIRSO और AIRWO ने देश भर के मजदूर ,किसान संगठनों,दलित उत्पीड़ित,अल्पसंख्यक संगठनों तथा प्रगतिशील लोकतांत्रिक ताकतों से इस मजदूर आंदोलन के साथ उठ खड़े होने एवं एकजुटता प्रदर्शित करने की अपील की है।
तुहिन, असीम गिरी (क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच RCF), बंदू मेश्राम , एम के दासन (जाति उन्मूलन आंदोलन CAM),अंजन आज़ाद (अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन AIRSO),एम सेल्वी( अखिल भारतीय क्रांतिकारी महिला संगठन AIRWO )
संपर्क -9425560952,9051169724,9890269435,9207602584,9080535115
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