गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर SIR पूरी तरह से महिला विरोधी ,गणतंत्र विरोधी है यह प्रमाणित हो गया *

विशेष सघन पुनरीक्षण SIR के क्रियान्वयन में सबसे ज्यादा चोट महिलाओं पर पड़ेगी ये आशंका शुरू से ही थी।SIR की जो अमानवीय प्रवृत्ति है उसमें जेंडर आधारित भेदभाव होना लाजिमी है ।बिहार में SIR के पहले दौर में ही ये पता चल गया था कि महिलाओं के लिए SIR की सभी शर्तें पूरा करना बहुत मुश्किल है ।SIR के दूसरे दौर में विभिन्न राज्यों से प्राप्त आंकड़ों से ये आशंका सही प्रमाणित हो रही है।विभिन्न सूत्रों से प्राप्त आंकड़ों से ये जानकारी मिली है कि राजस्थान,मध्यप्रदेश,गुजरात,पश्चिम बंगाल,तमिलनाडु और केरल इन छह राज्यों में कम से कम 23 लाख महिलाओं का नाम मतदाता सूची से काट दिया गया है जो पहले मतदाता थे।फलस्वरूप मतदाता सूची में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या कम हुई है।पहले उपरोक्त राज्यों में मतदाता सूची में प्रति हज़ार पुरुषों के पीछे 979 महिला थीं।जो अब कम होकर प्रति 1000 पुरुषों के पीछे 963 महिलाओं का हो गया है।गुजरात, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में प्रत्येक राज्य में हुए SIR में 5 लाख से अधिक महिलाओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।यहां तक कि केरल और तमिलनाडु जैसे दो राज्यों में जहां मतदाता सूची में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा थी,वहां भी एक लाख से अधिक महिलाओं का नाम मतदाता सूची से काट दिया गया है।इस बात की पूरी संभावना है कि उत्तर प्रदेश के आंकड़े आने के बाद अंतिम मतदाता सूची में पुरुषों और महिलाओं के बीच फासला और बढ़ेगा।क्या मतदाता सूची में संशोधन का ये रास्ता है?भारत के जैसे एक घोर मनुवादी पितृसत्तात्मक देश में जहां महिलाओं को जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुस्मृति के अनुसार पुरुषों पर निर्भर रहने का फरमान जारी किया जाता है वहां SIR अधिकांश भारतीय नागरिक महिलाओं का मताधिकार और नागरिक अधिकार छीन कर मर्दवादी समाज में उनकी दोयम दर्जे को क्या और भी दयनीय और पीड़ाजनक नहीं बना रहा है? 76 वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या में विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने का दंभ भरने वाली भारत की फासिस्ट मोदी सरकार और उसकी चाकर केंद्रीय चुनाव आयोग देश की महिलाओं को SIR के जरिए ये भीषण सजा दे रही है।RSS मनुवादी फासीवादी ताकतों के अघोषित हिंदुराष्ट्र में महिलाओं को उनके स्कूल उत्तीर्ण करने का प्रमाणपत्र या जमीन के मालिकाना का प्रमाणपत्र न होने के कारण फासीवादी राजसत्ता उनके साथ ये अन्याय कर रहा है।साथ ही फासिस्ट संघ परिवार,देश की महिलाओं को यह शिद्दत से बताना चाहता है कि उनके पूज्य संविधान क्रूर मनुस्मृति आधारित हिंदुराष्ट्र में महिलाओं की दशा दलितों ,उत्पीड़ितों आदिवासियों के साथ गुलाम की है।उन्हें संघ- भाजपा इंसान का दर्जा नहीं देता।
भारत जैसे अमरीकी साम्राज्यवाद पर निर्भरशील एक पिछड़े नव उपनिवेशिक देश में जहां क्रूर मनुस्मृति आधारित पितृसत्ता हावी है,महिलाओं का लिंगानुपात पुरुषों की तुलना में वैसे ही कम है।बहरहाल SIR,अब तक देश की महिलाओं ने मनुवादी पितृसत्ता के खिलाफ जितने भी संघर्ष किए हैं,चाहे वह लोकतांत्रिक निर्वाचित निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के लिए हो या शिक्षा ,रोजगार ओर लोकतांत्रिक संस्थानों में भेदभाव रहित समान अवसर ,समान अधिकार के लिए हो, सभी उपलब्धियों को नष्ट कर रहा है।और तो और SIR ,सीधे सीधे भारतीय संविधान और संविधान प्रदत्त महिला अधिकारों को खारिज कर रहा है।मोदी सरकार के निर्देशन में SIR,15 अगस्त 1947 के बाद देश की महिलाओं के खिलाफ सबसे बड़ा आघात है।क्या देश की महिलाओं को आने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस में संघी मनुवादी फासीवादी ताकतों के बुलडोजर राज के तहत कुचले जा रहे अन्य शोषित पीड़ित जनता के साथ मिलकर इस सबसे बड़े गैर लोकतांत्रिक दमन के खिलाफ एकजुट आवाज बुलंद नहीं करना चाहिए ?

THANKS FOR READING UPDATED NEWS. WE HOPE YOU ARE SUFFICIENT TO AND AGREE WITH TRULY INFORMATION ABOUT BLOG AND WEBSITE सड़क समाचार (roadwaynews.com) WRITE IF ANY COMMENTS INFO@ROADWAYNEWS.COM


Discover more from सड़क समाचार

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Optimized by Optimole
WP Twitter Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
×