ट्रंप! वेनेज़ुएला से अपने हाथ हटाओ!
अब समय आ गया है कि दुनिया की जनता अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ उठ खड़ी हो!
पिछले दो महीनों में दर्जनों नावों पर हमले, सौ से अधिक लोगों की हत्या और अब तक के सबसे बड़े नौसैनिक जमावड़े की कड़ी में, नव-फासीवादी ट्रंप ने अब वेनेज़ुएला पर सबसे भीषण आक्रमणों में से एक को अंजाम दिया है। यह हमला अमेरिकी सेना के विशेष बल 160वीं स्पेशल ऑपरेशंस एविएशन रेजिमेंट के नेतृत्व में किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को ‘गिरफ्तार’ कर देश से बाहर ले जाया गया है। नागरिक और सैन्य प्रतिष्ठानों पर किए गए बड़े पैमाने के सटीक हमलों से हुई हताहतों और तबाही के विस्तृत विवरण अभी सामने आना बाकी हैं।
सत्ता में आने के बाद से ही ‘अलगाववादी’ ट्रंप पूरे अमेरिकी महाद्वीप को अमेरिकी साम्राज्यवादी फरमान के तहत “संरक्षित क्षेत्र” बनाने के लिए मुनरो सिद्धांत का खुला आह्वान करते रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बताने में भी कोई संकोच नहीं किया। बेशक, अमेरिकी साम्राज्यवाद पूरे लैटिन अमेरिका को अपना पिछवाड़ा मानता है। शुरू से ही ट्रंप की नजर वेनेज़ुएला के विशालतम तेल भंडार और 1.36 ट्रिलियन डॉलर मूल्य की खनिज संपदा पर थी—लैटिन अमेरिका और कैरिबियन की पूरी प्राकृतिक संपदा को ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA)’ के तहत अमेरिका की रणनीतिक संपत्ति बनाने की योजना के हिस्से के रूप में यह किया गया। इसी दृष्टिकोण से ट्रंप प्रशासन ने एक सुविचारित ‘शासन परिवर्तन’ रणनीति बनाई, मादुरो सरकार को “नार्को-आतंकवादी” और “आतंकी ड्रग कार्टेल” करार दिया—जबकि अनेक अध्ययनों ने पहले ही वैश्विक नशीले पदार्थों के कारोबार में अमरीका की कुख्यात गुप्तचर संस्था सीआईए की संलिप्तता को उजागर किया है।
जैसा कि दुनिया की जनता जानती है, भले ही अमेरिका प्रत्यक्ष औपनिवेशिक शासन का दावा न करे, लेकिन सर्वोच्च साम्राज्यवादी शक्ति के रूप में उसके उदय का पूरा इतिहास नग्न लूट, दमन, जनसंहार और एक के बाद एक विनाश से भरा रहा है। अमेरिका के मूल निवासियों के उन्मूलन के दौरान यांकी आतंक ने उससे पहले की हर बर्बरता को पीछे छोड़ दिया। और युद्धोत्तर नव-औपनिवेशिक व्यवस्था का सर्वोच्च निर्णायक बनने के बाद अमेरिका द्वारा किए गए अत्याचार दुनिया की जनता को भली-भांति ज्ञात हैं। यही सब अमेरिकी साम्राज्यवाद को दुनिया की जनता का नंबर एक आतंकवादी शासन और आज का प्रधान शत्रु बनाता है।
वेनेज़ुएला पर अमेरिका का यह ताज़ा हमला न केवल उसकी संप्रभुता का खुला और घोर उल्लंघन है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून का भी सीधा उल्लंघन है। यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है, जिसका अमेरिका स्वयं भी हस्ताक्षरकर्ता है। पूरे लैटिन अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संयुक्त राष्ट्र की आपात बैठक बुलाने की मांग के साथ आगे आना चाहिए, ताकि अमेरिका द्वारा किए गए इस आतंकी हमले पर चर्चा हो सके—एक ऐसा दुष्ट और आपराधिक शासन, जो दुनिया की जनता के सामने कटघरे में है। दुनिया की जनता को आगे आकर वेनेज़ुएला से अमेरिकी सेनाओं की तत्काल वापसी, उसकी संप्रभुता की रक्षा और आत्मनिर्णय के पूर्ण अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
दुनिया की जनता का दुश्मन नंबर एक- अमरीकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!
अंतरराष्ट्रीय विभाग
सीपीआई (एमएल) रेड स्टार
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