हिंदुराष्ट्र

हिंदुराष्ट्र

क्या सोनाली बीवी जैसे भारतीय नागरिकों को बलपूर्वक बांग्लादेश भेजने से मोदी- योगी के सपनों का हिंदुराष्ट्र बन जाएगा ?

-तुहिन

उत्तर प्रदेश के नोएडा में पश्चिम बंगाल से आए कई प्रवासी मजदूर लंबे समय से रहते आए थे।उनमें पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से आई सोनाली बीबी और स्वीटी बीबी को बांग्ला भाषा में बात करते हुए सुनकर उत्तर प्रदेश की पुलिस ने उन्हें बांग्लादेशी भगाओ अभियान के तहत धर लिया।गर्भवती सोनाली ,उसके पति दानिश और उसके आठ साल के बेटे के साथ साथ स्वीटी बीबी और उनके दोनों नाबालिग बच्चों को केंद्र सरकार ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स BSF के हवाले कर दिया।BSF ने इन लोगों के लाख विरोध के बावजूद उन्हें पश्चिम बंगाल – बांग्लादेश सीमा से पुश बैक कर बांग्लादेश भेज दिया।इसी तरह बहुत सारे भारतीय नागरिकों को बांग्लादेश जबरन ढकेला गया है और धकेला जा रहा है।लेकिन मोदी सरकार को मुश्किल तब हुई जब बांग्लादेश की अदालत ने इन्हें भारतीय नागरिक मानकर जेल में डाल दिया।इधर पश्चिम बंगाल में भी इस मुद्दे पर काफी हल्ला गुल्ला हुआ।सोनाली बीबी के पिता भोदू शेख द्वारा सोनाली ,उसके बेटे और पति को भारत वापस बुलाने की अपील पर कोलकाता हाईकोर्ट ने सकारात्मक राय देते हुए कहा कि सोनाली भारतीय नागरिक हैं और गर्भवती हैं ,उन्हें अविलंब भारत वापस लाने के लिए केंद्र सरकार व्यवस्था करे।लेकिन मोदी सरकार ने अपने फैसले को सही मानकर सोनाली को बांग्लादेशी कहा और उन्हें वापस भारत लाने से इनकार कर दिया।तब कोलकाता हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार पर अदालत अवमानना का मुकदमा दर्ज करते हुए उसे फिर से सोनाली को बांग्लादेश से वापस लाने का आदेश दिया।तब भी मोदी सरकार ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल मानते हुए कुछ नहीं किया।तब मामला सुप्रीम कोर्ट में गया।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि गर्भवती और सोनाली बीबी को बांग्लादेश की जेल से बाहर निकाल कर भारत लाया जाय और उनका समुचित इलाज करवाया जाए।सोनाली के एक रिश्तेदार,बांग्लादेश में जाकर सोनाली बीबी और स्वीटी बीबी के लिए जमानत की कोशिश किए।मानवीय आधार पर बांग्लादेश की अदालत ने सोनाली बीबी को जमानत दी।लेकिन उनके पति दानिश ,स्वीटी बीबी और उनके दो नाबालिग बच्चे अभी भी बांग्लादेश से निकलने में सक्षम नहीं हो पाए हैं।सोनाली बीबी और उनके आठ साल के बच्चे के वापस आने पर पश्चिम बंगाल सरकार ने उनका समुचित इलाज करवाया है।सोनाली बीरभूम में अपने परिवार से मिलकर बहुत खुश हैं लेकिन वो अपने पति दानिश और स्वीटी बीबी के बांग्लादेश में फंसे होने के कारण चिंतित भी है। इधर बीरभूम में हुए SIR में सोनाली बीबी के पिता भोदू शेख का नाम 2003 के वोटर लिस्ट में होने के कारण SIR के नई सूची में सोनाली का नाम अद्यतन भी हुआ है।

हिंदुराष्ट्र के नए मॉडल उत्तर प्रदेश के मुखिया नए हिन्दू हृदय सम्राट योगी आदित्यनाथ ने इस बार असम को मात देने का ठान लिया है। CAA /NRC के समय असम में अवैध प्रवासी,घुसपैठिए या परिचयविहीन विदेशी इत्यादि टैग लगाकर गिरफ्तारी,डिटेंशन कैंप में सिर्फ संदेह के आधार पर लोगों को बड़े पैमाने पर कैद करना,प्रताड़ित करना और यातनाएं देने से शुरू कर लोगों को आत्महत्याएं करने पर मजबूर करना,यह सब कुछ हुआ है ।अब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।इसका सबूत है उत्तर प्रदेश शासन द्वारा राज्य के सारे कलेक्टरों को भेजा गया हालिया आदेश – जिसमें कहा गया है कि उन्हें अपने जिले में घुसपैठिए,अवैध प्रवासी और विदेशियों को चिन्हित करना और उनके लिए राज्य के प्रत्येक जिले में अस्थाई डिटेंशन सेंटर तैयार करना होगा।जहां चिन्हित किए गए अवैध प्रवासी/ विदेशियों को भेजा जाएगा।जहां से उनको फिर केंद्र सरकार के निर्देशानुसार यथास्थान भेजा जाएगा।
फिलहाल यूपी के विभिन्न जिलों में जैसे कि बहराइच,वाराणसी,गाजियाबाद,मिर्जापुर,अलीगढ़ आदि जिलों में पुलिस डायन शिकार करने की तरह बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठिया ढूंढने में लगी है।इस अभियान में यूपी पुलिस ,मुसलमानों का खासकर पश्चिम बंगाल से आए बांग्लाभाषी मुसलमानों का शिकार कर रही है।फिलहाल गोदी मीडिया के पास सिवाय उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी और रोहिंग्या को ढूंढने के और इस बिना पर नफ़रत और विभाजन पैदा करने के और कोई काम नहीं है। टी वी ऑन करते ही गोदी मीडिया का नफ़रती हैडलाइन सामने आ जाता है जैसे कि ” योगी की चोट,घुसपैठियों में कोहराम” या ” बुलडोजर बाबा की दहशत,बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कहर ” आदि।इसी अंतहीन नफ़रत ने केरल में मजदूरी की तलाश में गए छत्तीसगढ़ के दलित समुदाय के मजदूर रामनारायण बघेल की जान ले ली।जिन्हें भगवा गिरोह ने पलक्कड़ जिले में बांग्लादेशी के संदेह में इतना पीटा की उनकी जान चली गई।पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने इतनी बेरहमी से किसी को मारते नहीं देखा,उनके जिस्म का हर हिस्सा टूटा हुआ था।और तो और केरल जैसे तथाकथित प्रगतिशील राज्य में जब भगवा गुंडे ,रामनारायण से भारतीय होने का प्रमाण मांगते हुए मार रहे थे तो वह बांग्ला में नहीं बल्कि हिंदी मिश्रित छत्तीसगढ़ी में बोल रहा था।फिर भी संघी गुंडों ने उन्हें मार डाला।ठीक इसी तरह महाराष्ट्र , ओडिशा सहित कई राज्यों में पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर जो कि मुसलमान थे नफ़रत की आंधी में भगवा गिरोह द्वारा मार डाले गए हैं।

बिहार के बाद जिन 12 राज्यों में चुनाव आयोग ने SIR लागू किया है उनमें यूपी एक खास राज्य है जहां पूरे देश में सबसे ज्यादा वोटर है।SIR का असल मकसद फर्जी वोटरों को चिन्हित करना नहीं है बल्कि प्रवासी मजदूरों/ नागरिकों को चिन्हित कर,उनका मताधिकार और नागरिक अधिकार छीन कर देशनिकाला करने के लिए अविलंब डिटेंशन सेंटर में भेजना है,यह उत्तर प्रदेश शासन के क्रियाकलापों से एकदम स्पष्ट है।राज्य के मुख्यमंत्री ने इसके लिए कानून व्यवस्था की रक्षा,सांप्रदायिक सौहाद्र और सर्वोपरि” राष्ट्रीय सुरक्षा “की दुहाई दी है।अभी 12 राज्यों में SIR के जो नवीन आंकड़े आए हैं उनके अनुसार उत्तर प्रदेश में जहां कुल वोटर 15.4 करोड़ हैं।SIR की प्रक्रिया में पूरे देश में सबसे ज्यादा 2.89 करोड़ वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं।
योगी आदित्यनाथ और उनके प्रशासनिक अधिकारियों को जरूर यह मालूम होगा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को संयुक्त राष्ट्र संघ ने बहुत उत्पीड़ित समुदाय की सूची में रखा है और इनकी रक्षा के लिए सभी देशों की सरकारों को विशेष कदम उठाने को कहा है।वैसे भी रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या हमारे देश में बहुत कम है,बांग्लादेश में ज्यादा है।जब तक शेख हसीना के नेतृत्व में आवामी लीग ,बांग्लादेश की सत्ता पर काबिज़ थी,तब तक फासिस्ट संघ परिवार को बांग्लादेशी घुसपैठियों की चिंता नहीं थी।क्योंकि मोदी सरकार के साथ शेख हसीना सरकार के मधुर रिश्ते थे।लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं।हसीना के बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल होना और भारत सरकार द्वारा उन्हें राजनयिक शरण देने के बाद से ही संघ परिवार और अंधभक्त,देश में व्याप्त सारी समस्याओं के लिए घुसपैठिए खासकर बांग्लादेशी या रोहिंग्या मुसलमानों को प्रचारित करते हैं।और उत्तर प्रदेश,छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश,ओडिशा,उत्तराखंड,राजस्थान,महाराष्ट्र,दिल्ली,बिहार,असम आदि डबल इंजन सरकारों के राज्यों में ये सारी कवायद इस्लामोफोबिया के तहत याने मुसलमानों के प्रति नफ़रत और उन्हें अलगाव में डालने के लिए है।उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के हालिया निर्देश के तहत 17 नगर निगमों से कहा गया है कि वहां सफाई कर्मचारियों के साथ मिलकर काम कर रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को चिन्हित कर उनकी सूची पुलिस को सौंपना है।अभी योगी सरकार ने 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी को ही खत्म कर दिया।

उत्तर प्रदेश में जहां नफ़रत और विभाजन का ये तांडव चल रहा है वो राज्य सरकारी आंकड़ों के अनुसार मानव विकास सूचकांक में बहुत नीचे है।राज्य में बेरोजगारी और गरीबी चरम पर है।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार राज्य में दलितों/ उत्पीड़ितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार सबसे ज्यादा है।गरीबों, मेहनतकशों,अल्पसंख्यकों के आशियानों को बुलडोजर से तोड़ना,सवर्ण दबंगों की गुंडई को चरमोत्कर्ष पर पहुंचना और झूठे मुठभेड़ में उत्पीड़ितों और अल्पसंख्यकों को मारकर राज्य को अपराध मुक्त घोषित करना उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोत्तम उपलब्धि है।लेकिन ये सब प्रतिदिन बुलडोजर बाबा की चरण वंदना करने वाले कॉरपोरेट घरानों के टुकड़ों पर पलने वाले गोदी मीडिया के टुच्चे पत्रकारों को दिखता नहीं है।

असम में डिटेंशन सेंटर तैयार करने के पीछे राज्य सरकार का तर्क यह था कि यह उत्तर पूर्व में सीमा की सुरक्षा के लिए जरूरी है।लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा तो सिर्फ एक ही विदेशी देश नेपाल से लगी है।तो उत्तर प्रदेश शासन को किस देश से खतरा है ?वैसे तो नेपाल से संबंध भारत सरकार के ठीक हैं और उत्तर प्रदेश में नेपाली नागरिकों को अभी तक भगवा गुंडे या राज्य सरकार परेशान भी नहीं कर रही है।तो उत्तर प्रदेश में बांग्लाभाषी मेहनतकश जनता के खिलाफ यह नफरती मुहिम क्यों?

वैसे तो सभी भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों और हालिया ईसाइयों के खिलाफ नफरती हिंसक मुहिम उनके हिंदुराष्ट्र परियोजना के लिए लाजिमी है।पिछले 23 दिसंबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आधी रात को हज यात्रा पूर्ण कर चुके मुस्लिम समाज के 120 वरिष्ठ नागरिकों जिनमें महिलाएं भी शामिल थी को रायपुर पुलिस ने घर से बलपूर्वक उठाया और अपमानजनक तरीके से दिन भर उनको हिरासत में रखकर पूछताछ की।जिसके खिलाफ रायपुर के मुस्लिम समाज ने विरोध प्रदर्शन भी किया।इसी तर्ज़ पर हर भाजपा शासित राज्यों में घुसपैठियों खासकर बांग्लाभाषीयों को ढूंढा जा रहा है,बेलगाम गिरफ्तारियां हो रही हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।असल में SIR के नाम पर घुसपैठियों को कुचल देने का जो हिंसक मुहिम है उसका एक बड़ा मकसद बंगाल को फतह करना है।दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी संगठन RSS के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने इसी उद्देश्य से संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में सार्वजनिक गीता पाठ सहित बंगाल में कई सम्मेलन आयोजित किया ।उनके अनुसार भारत में निवास कर रहा हर व्यक्ति हिन्दू है और हिंदुराष्ट्र की घोषणा करने की क्या जरूरत है।भारत एक हिंदुराष्ट्र है।हिटलर को परम पूज्य मानने वाले सर संघ चालक मोहन भागवत ने तो कहा है कि इस बार बंगाल में परिवर्तन होगा और हिंदुराष्ट्र की पक्षधर सरकार बनेगी ।इसीलिए संघ परिवार का राजनैतिक अंग भाजपा कमर कस के बांग्लाभाषी मेहनतकश जनता को निशाना बना रही है।इस मामले में भाजपा के मुख्यमंत्रियों में आपस में घोर प्रतिद्वंदिता है कि इस्लामोफोबिया के तहत कौन सबसे ज्यादा हिंसक मुहिम चला सकता है।प्रतियोगिता में हेमंत विश्व शर्मा ,देवेंद्र फडणवीस,पुष्कर धामी,भजन लाल शर्मा हैं तो डॉक्टर मोहन यादव भी डटे हैं। विष्णुदेव साय खुद को शुद्ध सनातनी साबित करने में लगे हैं तो रेखा गुप्ता को तो हेट स्पीच में महारत हासिल है।और तो और योगी आदित्यनाथ तो हिन्दू हृदय सम्राट के रेस में मोदीजी के ठीक पीछे दौड़ रहे हैं। इसीलिए बंगाल चुनाव के बाद भी फासिस्ट संघ परिवार का प्रमुख हथियार नफ़रत,डर और विभाजन बेरोकटोक जारी रहेगा , उत्तर प्रदेश या अगले किसी राज्य के चुनाव के मद्देनजर।

THANKS FOR READING UPDATED NEWS. WE HOPE YOU ARE SUFFICIENT TO AND AGREE WITH TRULY INFORMATION ABOUT BLOG AND WEBSITE सड़क समाचार (roadwaynews.com) WRITE IF ANY COMMENTS INFO@ROADWAYNEWS.COM


Discover more from सड़क समाचार

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Optimized by Optimole
WP Twitter Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
×