14 अप्रैल जाति उन्मूलन दिवस

14 अप्रैल जाति उन्मूलन दिवस

14 अप्रैल को जाति उन्मूलन दिवस के रूप में मनाएं

भगवा कारपोरेट मनुवादी फासीवादी तानाशाही द्वारा डॉ. अम्बेडकर को अपनी छवि में ढालने के कदम का डटकर विरोध करें

१४ अप्रैल को डॉ. अम्बेडकर की जयंती मनाने के लिए जाति उन्मूलन आंदोलन (सीएएम) ने अम्बेडकरवादी विचारों के भगवाकरण के आरएसएस के एजेंडे को पूरी तरह से उजागर करने का आह्वान किया है। मोदी सरकार ने 2016 में, ‘अंबेडकर पंचतीर्थ’ विकास कार्यक्रम की घोषणा की थी, जो भगवा थिंक टैंक द्वारा गढ़ा गया एक शब्द है। इसमें जन्मभूमि, महू में डॉ. अम्बेडकर का जन्म स्थान, विद्याभूमि, लंदन में वह स्थान जहां वे यूके में अध्ययन के दौरान रुके थे, दीक्षाभूमि, नागपुर में जहां उन्होंने बौद्ध धर्म ग्रहण किया, दिल्ली में महापरिनिर्वाण स्थल, मृत्यु का स्थान और मुंबई में चैत्यभूमि शामिल हैं,जिस स्थान पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मोदी सरकार ने दिल्ली में 15 जनपथ पर अंबेडकर फाउंडेशन स्थापित करने की योजना को आगे बढ़ाया है। दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी संगठन RSS के विचारकों की ओर से एक जहरीला कदम यह भी है कि वह बाबासाहेब अम्बेडकर को हिंदुराष्ट्र के पैरोकार और मुसलमानों के विरोधी के रूप में प्रचारित करने वाले साहित्य को प्रकाशित करने में लगे हैं।

विडंबना यह है कि आरएसएस की ओर से भारत के सबसे उत्पीड़ित दलितों के सर्वोच्च नेता डॉ अंबेडकर को हथियाने के लिए यह जघन्य कदम ऐसे समय में हो रहा है जब यह प्रतिक्रियावादी कॉर्पोरेट भगवा नव-फासीवाद को थोप रहा है, जिसका वैचारिक आधार मनुवादी-हिंदुत्व है।वह अम्बेडकरवादी विचारों का घोर विरोधी है। जब डॉ. अम्बेडकर भारतीय संविधान का मसौदा तैयार कर रहे थे, तब आरएसएस अपने मुखपत्र ऑर्गनाइज़र के माध्यम से क्रूर मनुस्मृति को भारतीय संविधान के रूप में स्थापित करने के लिए अभियान चला रहा था, जिसके अनुसार दलितों उत्पीड़ितों और महिलाओं को मानव नही ,गुलाम माना जाता है।

जाहिर है, मनुवादी प्रतिक्रियावादी ताकतों द्वारा अम्बेडकर के प्रति यह नई आत्मीयता, जिसे ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान उन्हें ‘हिंदू धर्म’ का सबसे बड़ा दुश्मन कहने में कोई हिचक नहीं थी, उत्पीड़ित दलितों और तथाकथित निम्न जातियों को हिंदुत्व की तह में घसीटने की एक सुविचारित रणनीति का हिस्सा है। जिस भेदभाव पूर्ण हिंदुत्व के खिलाफ डॉ. अम्बेडकर जीवन भर लड़ते रहे, के महान योगदान को छिपाने वाली यह संस्कृतिकरण प्रक्रिया, सबसे वैचारिक अपराध है।यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे भारत में दलितों उत्पीड़ितों पर सत्तारूढ़ शासन के समर्थन से सबसे बड़ा अत्याचार किया जा रहा है।

इस संदर्भ में, जाति उन्मूलन आंदोलन भारत के सभी प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों के साथ दलितों,महिलाओं,आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और ट्रांसजेंडरों सहित तमाम उत्पीड़ित वर्गों से अपील करता है कि वे मोदी शासन की ओर से इस षड्यंत्रकारी रणनीति का पर्दाफाश, निंदा और विरोध करें। डॉक्टर अम्बेडकर के महान योगदानों में ‘जाति का उन्मूलन’ शामिल है,जिसे ये संघी फासीवादी भुला देना चाहते हैं।

जाति उन्मूलन आंदोलन,सभी उत्पीड़ित व मेहनतकश जनता और सभी लोकतांत्रिक ताकतों से निम्नलिखित मांगों और आह्वानों के साथ 14 अप्रैल को जाति उन्मूलन दिवस के रूप में मनाने की अपील करता है।

  1. फासिस्ट संघ परिवार के ब्राह्मणवादी हिंदुराष्ट्र परियोजना का प्रतिरोध करें।यह अडानी, अंबानी सरीखे महाभ्रष्ट कॉरपोरेट घराने के बेशुमार लूट और 95 फीसदी बहुजन मूलनिवासियों के विनाश की परियोजना है।
  2. जाति व्यवस्था, अस्पृश्यता, और जीवन के सभी क्षेत्रों में जातिगत भेदभाव के सभी रूपों के खिलाफ अडिग संघर्ष छेड़ें , जो मंदिरों,मठों, शैक्षणिक संस्थानों और यहां तक ​​​​कि दुकानों और रेस्तरां में सामाजिक क्षेत्रों में वापस लौट कर आ रहा है।
  3. उन भगवा संगठनों/ गिरोहों का प्रबल विरोध करें जो ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था की प्रशंसा करते हैं , जो अस्पृश्यता और अमानवीय जाति प्रथाओं में लिप्त हैं।साथ ही जो अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमान और ईसाई समुदाय के खिलाफ हिंसक हिंदुत्ववादी मुहिम का संचालन करते हैं।
  4. आर्थिक आरक्षण को समाप्त करो और जाति-आधारित आरक्षण को निजी-कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी विस्तारित करो।
  5. सभी कारपोरेट समर्थक भूमि कानूनों को निरस्त करो और सभी सरकारी भूमि , धार्मिक संस्थानों और मठों की भूमि दलितों और उत्पीड़ित जनता को “जमीन जोतने वाले को” के सिद्धांत के आधार पर वितरित करो।
  6. अंतर्जातीय और अंतर्धार्मिक विवाहों को प्रोत्साहित करें,ऐसे विवाह करने वाले दंपत्तियों की पूर्ण सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करने की मांग करें। ताकि भारत को एक जातिविहीन,अंधविश्वास व धार्मिक पाठंडों से मुक्त,धर्मनिरपेक्ष,लैंगिक समानता युक्त देश में बदलने में सुविधा हो।
  7. हम मांग करते हैं कि सभी अम्बेडकर साहित्य को भगवा फासीवादियों द्वारा विकृत किए बिना भारतीय भाषाओं में उनके मूल रूप में मुद्रित और अनुवादित किया जाए।उन्हें रियायती दरों पर वितरित किया जाए।

8.नई शिक्षा नीति और शिक्षा में भगवाकरण का विरोध करें। पाठ्यक्रम और स्कूलों में भगवा फासीवादियों द्वारा शुरू किए गए सभी धार्मिक ग्रंथों के पाठ ,शिक्षा के विकृतिकरण व सांप्रदायीकरण पर रोक,ज्योतिष को विज्ञान के रूप में स्थापित करने के षडयंत्र व ब्राम्हणवादी खोखले धार्मिक आचार व्यवहार को बंद करने की मांग करें।

  1. फासिस्ट मोदी सरकार की शुरू से ही जाति जनगणना करने की न तो मंशा थी और न अब है।जाति उन्मूलन आंदोलन CAM यह मांग करता है कि भारत में जाति जनगणना को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर उपयुक्त बजट,संसाधन और ठोस कार्ययोजना के साथ अविलंब लागू किया जाए।

बंदु मेश्राम, तुहिन, एम के दासन
(केंद्रीय संयोजकगण)

जाति उन्मूलन आंदोलन (सीएएम)
12 अप्रैल 2026

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