श्रमिकों की जीवन व सामाजिक सुरक्षा

श्रमिकों की जीवन व सामाजिक सुरक्षा

माननीय मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ।

विषय : नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उत्पन्न श्रमिक असंतोष के परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश में तत्काल न्यूनतम मजदूरी का वेज रिवीजन, श्रमिकों की जीवन व सामाजिक सुरक्षा हेतु आवश्यक कार्रवाई तथा श्रमिकों के उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाने के संबंध में।

महोदय,

आप अवगत हैं कि नोएडा औद्योगिक क्षेत्र तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में श्रमिकों का असंतोष तेजी से उभर कर सामने आया है। ऐसी गंभीर स्थिति में भी श्रम मंत्री का बयान बेहद गैर जिम्मेदाराना है। अपनी जिम्मेदारियां पर लापरवाही बरतने के लिए प्रदेश के श्रमिकों और जनता से माफी मांगने की जगह सरकार के श्रम मंत्री द्वारा इसमें पाकिस्तानी कनेक्शन खोजा जा रहा है, जो अत्यंत निंदनीय और श्रमिकों का अपमान है। इसी तरह उपद्रवी तत्वों के नाम पर श्रमिक नेताओं और श्रमिकों का बर्बर उत्पीड़न लोकतंत्र के लिए अशुभ है। जिस पर रोक तत्काल रोक लगनी चाहिए। आप जानते हैं कि श्रमिकों की प्रमुख मांगें निम्न रही हैं—

  • बढ़ती महंगाई को देखते हुए वेतन में समुचित वृद्धि।
  • कार्य अवधि हर हाल में 8 घंटे सुनिश्चित की जाए तथा इससे अधिक कार्य पर दुगना ओवरटाइम वेतन दिया जाए।
  • औद्योगिक इकाइयों में मानवीय कार्य परिस्थितियाँ सुनिश्चित हों तथा श्रमिकों का उत्पीड़न बंद किया जाए।
  • श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन कराया जाए।

महोदय,

आज अखबारों से ज्ञात हुआ कि नोएडा श्रमिक असंतोष की पृष्ठभूमि में कल देर रात सरकार द्वारा गाजियाबाद और नोएडा के श्रमिकों के वेतन में ₹3000 की अंतरिम वृद्धि और प्रदेश के नगर निगमों वाले शहरों में कार्यरत मजदूरों के वेतन में ₹2500 तथा अन्य जनपदों में कार्यरत मजदूरों के वेतन में ₹1000 की वृद्धि की गई है। जो अपर्याप्त और विधि के अनुरूप नहीं है। आपके संज्ञान में लाना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में पिछले 10 वर्षों से न्यूनतम मजदूरी का वेज रिवीजन नहीं हुआ है। न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के अनुसार प्रत्येक 5 वर्ष में वेज रिवीजन किया जाना अनिवार्य है। वर्ष 2014 में अंतिम वेज रिवीजन हुआ था, जिसे विधिक रूप से वर्ष 2019 में पुनः किया जाना चाहिए था। विधानसभा एवं विधान परिषद में श्रम मंत्री द्वारा घोषणा के बावजूद आज तक वेज रिवीजन नहीं किया गया है।
इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के श्रमिकों की मजदूरी दर केंद्र सरकार की तुलना में लगभग आधी रह गई है और बाजार दर से भी बेहद कम है। यह स्थिति श्रमिकों के सम्मानजनक जीवन के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है।
अतः हमारा प्रथम निवेदन है कि—

  • प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी का तत्काल वेज रिवीजन घोषित किया जाए तथा इसे केंद्र सरकार के न्यूनतम वेतन के समतुल्य ₹26,000 प्रति माह किया जाए।

महोदय,

लगभग 200 वर्षों के संघर्ष के बाद श्रमिकों ने 8 घंटे कार्य दिवस का अधिकार प्राप्त किया था—

8 घंटे काम, 8 घंटे मनोरंजन, 8 घंटे विश्राम।
किन्तु हाल के वर्षों में इस अधिकार पर लगातार हमला हुआ है। नए लेबर कोड तथा राज्य स्तर पर कारखाना अधिनियम में संशोधन कर कार्य अवधि को 12 घंटे तक बढ़ा दिया गया है, जो श्रमिकों को अमानवीय परिस्थितियों में धकेलता है और उनके जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
अतः हमारा दूसरा निवेदन है कि—

  • कार्य अवधि 12 घंटे करने से संबंधित सभी कानून एवं शासनादेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएँ।
  • प्रदेश में कार्य अवधि हर हाल में 8 घंटे सुनिश्चित की जाए।
  • अतिरिक्त कार्य पर दुगना ओवरटाइम वेतन सुनिश्चित किया जाए।

साथ ही निवेदन है कि—

  • नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में आक्रोशित श्रमिकों और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों का किसी भी प्रकार का उत्पीड़न न हो, यह सरकार सुनिश्चित करे।
  • श्रमिकों की सामाजिक एवं जीवन सुरक्षा के प्रभावी प्रबंध किए जाएँ। मजदूर विरोधी लेबर कोड वापस लिए जाए।
  • श्रम कानूनों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए और ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, बोनस, हाजरी कार्ड, वेतन पर्ची और सुरक्षा उपकरण देने की गारंटी की जाए।
  • आपकी अध्यक्षता में श्रमिक संगठनों की बैठक शीघ्र बुलाने का आदेश दिया जाए ताकि श्रमिक समस्याओं का लोकतांत्रिक समाधान हो सके।

हमें आशा है कि आप उपरोक्त मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए प्रदेश में कानून का राज, शांति, समृद्धि और विकास सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

प्रतिलिपि –
प्रमुख सचिव (श्रम), उत्तर प्रदेश, लखनऊ।

भवदीय,

दिनकर कपूर
पूर्व अध्यक्ष,
यू.पी. वर्कर्स फ्रंट
मो. 9450153307

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